पोस्टमार्टम क्या है? पोस्टमार्टम क्यों करते हैं? पोस्टमार्टम कैसे किया जाता है?postmortem kya hota hai in hindi
postmortem kya hota hai in hindi
दोस्तों पोस्टमार्टम मरने के बाद वाली एक तरह की सर्जरी है। जहां पर कई सारी बातें सामने आती है। जहां सबसे पहले चीज तो यह है कि पोस्टमार्टम कभी भी अपनी मर्जी से नहीं किया जा सकता बल्कि मरे हुए इंसान के घरवालों की इजाजत लेनी बहुत जरूरी है। लेकिन अगर ऐसी कोई स्थिति आ जाती है। जहां मरने वाला व्यक्ति अनजान है और उसका कोई भी परिजन अभी तक सामने नहीं आया तो ऐसे ही इस्थिति में पोस्टमार्टम बिना किसी से पूछे पुलिस की राय लेकर कर दिया जाता है या फिर अगर मरने वाले व्यक्ति संदिग्ध है। तभी पुलिस की राय लेकर पोस्टमार्टम के काम को अंजाम दिया जाता है।
अब आपको यह तो पता चल गया। पोस्टमार्टम कैसे स्थिति में किया जा सकता है, लेकिन सवाल यही आता है कि पोस्टमार्टम क्यों होता है तो दोस्तों पोस्टमार्टम करने की जो सबसे बड़ी वजह है यो ए है कि पोस्टमार्टम के बाद मरने की वजह का पता लगाया जा सकता है। आपको ही चीज मालूम होगी। सामान्य स्थिति में मौत होने पर अक्सर परिवार वाले उसके शव का पोस्टमार्टम नहीं करवाते हैं क्योंकि उन्हें पता रहता है कि मृतक की मौत किस कारण हुई मान लीजिए। अगर कोई व्यक्ति कई दिनों से कैंसर से पीड़ित है और घर पर उसका इलाज चल रहा है,
लेकिन वह इलाज चलते-चलते मर जाता है और इस स्थिति में पोस्टमार्टम की कोई जरूरत नहीं होगी क्योंकि सभी को पता है मरने वाला व्यक्ति कैंसर का शिकार होकर मरा है। लेकिन जब मौत संदिग्ध हालत में हो और जब यह लगे कि इशू साइड है या फिर इसके पीछे कोई और आपराधिक मामला लग रहा है या किसी संदिग्ध स्थिति में मृतक की मौत हुई है या फिर एक्सीडेंटल केस को यानी कि ऑल टोटल
अगर कहे तो मरने वाले व्यक्ति की मौत का असल कारण जब जानना हो तो उसके शरीर का पोस्टमार्टम किया जाता है। एक्सीडेंटल केस में भी पोस्टमार्टम इस लिऐ क्या जाता है ताकि यह पता चल सके कि किस जगह पर चोट लगने की वजह से व्यक्ति मरा है।
मृतक को जहर देकर मारा गया है या उसकी मौत मारपीट पर हुई है या फिर मरने का कारण दम घुटना है और पोस्टमार्टम में यह पता चलता है कि मौत कितने घंटे पहले हुई है। अब हम इस समय की बात करें तो दोस्तों यहां सवाल यह आता है कि
पोस्टमार्टम करना किस वक्त सही है तो दोस्तों जानकारों का कहना है। किसी भी व्यक्ति के मरने से 6 से 10 घंटे के भीतर ही उसका पोस्टमार्टम हो जाना चाहिए क्योंकि शब्द के बाद मरे हुए शरीर में कुछ बदलाव देखने को मिलते हैं। जैसे बॉडी का कट जाना है या फिर अगर साफ शब्दों में कहें तो 6 से 10 घंटे के बाद मृतक का शरीर गलना शुरू हो जाता है। जिससे मौत की असली वजह का पता लगाना थोड़ा मुश्किल हो जाता है।
अगर बात करें पोस्टमार्टम में क्या चुनौतियां आती है? दोस्तों पोस्टमार्टम की सबसे बड़ी चुनौती तो मरा हुआ शरीर होता है क्योंकि अगर व्यक्ति की मौत को ज्यादा समय हो गया और बॉडी कई दिनों बाद मिली है तो ऐसी स्थिति में पोस्टमार्टम। के जरिए मौत के सच तक पहुंचना बड़ा मुश्किल हो जाता है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के जरिए पुलिस की जांच की दिशा बदलती है। उसे आरोपी पकड़ा जाता है
क्योंकि जब तक पोस्टमार्टम की रिपोर्ट सामने नहीं आती तब तक मरे हुए व्यक्ति के मरने के सही समय और कारण का पता नहीं चल पाता। मान लीजिए किसी का मर्डर 8:00 बजे हुआ है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह चीज साफ हो गई है कि वह 8:00 बजे मारा है तो पुलिस अपनी जांच यूसी हिसाब से करेगी
और यह देखेगी। मरे हुए व्यक्ति की जान पहचान वाले से लेकर दुश्मन तक 8:00 बजे कहां थे ताकि उन सभी की लोकेशन को ट्रेस करके पता लगाया जा सके कि कौन मरने वाले व्यक्ति के पास था और कौन है
रात में पोस्टमार्टम क्यों नहीं होता है
दोस्तों अक्सर आप लोगों ने एक चीज नोटिस की होगी कि पोस्टमार्टम कभी भी रात में जल्दी नहीं होता है। यह हमेशा दिन में ही होता है जिसका एक कारण में बिजली की रोशनी में खून का रंग बदल जाता है। ऐसे में अगर पोस्टमार्टम रात के समय में किया जाएगा तो खून की केवल बिजली की रोशनी से देखना संभव हो पाएगा। लेकिन अगर पोस्टमार्टम! दिन के समय होता है तो उसे सूरज की रोशनी में देखा जा सकता है जिससे मरे व्यक्ति की मौत के बारे में अच्छे से पता लगाया जा सके।
दोस्तों संदेश का जो पोस्टमार्टम है, वह दो चरणों में होता है। पहले चरण में शरीर की बाहर स्थिति का परीक्षण होता है जैसे कि मृतक के शरीर का विकास कैसा है। मृतक का स्वास्थ्य कैसा है, उसका लिंग कौन सा है या नहीं। वह स्त्री है या पुरुष की त्वचा का रंग कैसा है। तू बाल कैसे हैं कहीं उसके शरीर में किसी प्रकार की चोट वगैरा तो नहीं है।
यानी कि अगर साफ तौर पर कहे तो मृतक के बाहरी शरीर में जो भी चीज होती है, उसे नोटिस करके पन्ने में लिखा जता है फिर मारने वाला व्यक्ति इंटेल बॉडी का पोस्टमार्टम होता है की कही अंधुनरी चोट तो नहीं आई। कोई हड्डी तो नहीं टूटी। हाथो में सूजन तो नही याई अगर इन सारी चीजों को जांचने के लिए शरीर का चीर फाड़ होता है। तब जाकर पता चलता है कि मरने वाले व्यक्ति की मौत का असल कारण और समय क्या है?
उम्मीद है आप को पोस्टमार्टम से जुड़े सभी सवालों का जवाब मिल गया होगा। अब आपका इस पर क्या कहना है? कमेंट में जरूर बताइए और इसी तरह के पोस्ट देखते रहने के लिए हमारे वेबसाईट loveislifes .com को सब्सक्राइब करना बिल्कुल ना भूलें और हम फिर मिलेंगे एक नई पोस्ट लू के साथ तब तक ले जय हिंद जय भारत।