नमस्कार दोस्तों आप सभी को स्वागत है आज का इस New Post के साथ ।जिसका title हैं।बच्चे जन्म लेते ही क्यों रोते हैं?जन्म लेते बच्चे क्यों रोते हैं
बच्चे जन्म लेते ही रोते क्यों और क्या है। इसके पीछे का रहस्य क्या है दोस्तों जब किसी घर में बच्चे की किलकारियां गूंजती है तो हर तरफ खुशी फेल जाति है लोग एक दूसरे को मिठाइयां खिलाकर अपनी खुशी जाहिर करते हैं।
बच्चे जन्म लेते ही क्यों रोते हैं?जन्म लेते बच्चे क्यों रोते हैं? bachche janm lete hee kyon rote hain?
यानी की यो वक्त होता है जब हर कोई खुश नजर आता है।इसके ठीक उलट।पैदा होने वाला बच्चा रोता नजर आता है।
अब सवाल उठता है की याखिर न्यूली बोन बेबी यानी की नवजात शिशु जन्म लेते ही रोते क्यों हैं । अब लोजकिली तो ए होना चाहिए की जेसे सारे लोग उस बच्चे की जन्म पर खुश हो रहे है ।
।उसे भी खुश होना चाहिए क्या नही इस बच्चे को खुश होना चहिए खिलखिलाना चहिए लेकिन इसके उलट यो रोने लगता है आप यकीन नहीं करेंगे दोस्तो लेकिन नवजात का इस तरह से होना उसके ठीक होने का उसके हेल्दी होने का सिग्नल होता है अगर जन्म के तुरंत बाद बच्चा ना रोए तो उसकी जान भी जा सकते है
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।दोस्तो दुनिया में आते ही छोटे बच्चे का पहला काम रोना होता है अपने दिल की बात कहने और अपनी जरूरतों को बताने के लिए। नवजात बच्चों के पास एक ही तरीका होता है और यो है रोना इसके पीछे मेडिकल साइंस के अनुसार क्या वजह होती है यो बताएं उससे पहले ।
नवजात बच्चों को रोने को लेकर हिंदू धर्म शास्त्रों में क्या उल्लेख मिलता है, वह बता देते हैं। इसे ईश्वर का विधान न कहे तो और क्या कहे जो जीवित है उसे एक न एक दिन इस दुनिया से जाना ही है और जिसकी मौत हो चुकी है उसे नया शरीर लेकर वापस इस धरती पर आना ही है
इस तरह तो ब्रह्मा का सृष्टि चक्र चलता रहता है ब्रह्मा जी के सृष्टि चक्र से जुड़े प्रसंग की व्याख्या विष्णु पुराण में लिखी गई इसमें किसी बच्चे को पहली बार रोने का रहस्य छिपा है
विष्णु पुराण में सृष्टि रचना के समय का जो वर्णन मिलता है उसमे जो ब्रह्मा जी अपने जैसे पुत्र को उत्पन्न करने के बारे में सोच रहे थे। तब अचानक उनकी गोद में नीले रंग का एक बच्चा आ जाता है । रोता हुआ मायावि बच्चा ब्रह्मा जी की गोद से उतर कर इधर-उधर भागने लगे। तब ब्रह्मा जी ने उस बच्चे से पूछा, तुम क्यों रो रहे हो । जवाब में उस बच्चे ने उस्सुकता ब्रह्मा जी के सामने कई सवाल रख दिया उसने ब्रह्मा जी से कहा, मैं कहां हूं, कौन हूं, मेरा नाम क्या है?
तब ब्रह्मा जी ने बच्चे से कहा जन्म लेते ही तू ने रोना शुरू कर दिया इसलिए तुम्हारा नाम रूद्र है ब्रह्मा जी ने रूद्र नाम बताने के बाद बच्चा 7 बार फिर रोया उसे ब्रह्मा जी ने फिर से 7 नाम और दिए ये नाम थे भव शव इंसान पशुपति, भीम उग्र और महादेव इस तरह रूद्र के टोटल 8 नामों । कहा जाता है की। इसके बाद ही नवजात शिशु में रोने की परंपरा सुरूवत हुए मान्यता है कि रूद्र से पहले बच्चे जन्म के समय नहीं रोते थे। हिंदू शास्त्र के अनुसार विष्णु पुराण में नवजात बच्चों के रोने से संबंधित किसी मान्यता का वर्णन मिलता है।
इसके उलट नवजात बच्चे की पहली बार रोने से जुड़े क्वेश्चन का आंसर मेडिकल साइंस भी ढूंढे उससे जुड़े दूसरा पहलू भी हमारे सामने आते है यो दूसरा पहलू क्या है अब यो भी समझ लेते है जब बच्चो का जन्म लेते ही रोना बहुत जरूरी होता है क्युकी रोते वक्त बच्चे अपनी पहली सांस लेते हैं पहली बार रोना मतलब पहली बार। सांस लेना फेफड़ों में ऑक्सीजन भरना तो वैसे ही टेक्निकल देखे खिलखिलाकर हसने से बच्चे सांस लेने की शुरुआत कर सकते हैं क्योंकि खिलखिलाते वक्त भी तो हमारे फेफड़े में हवा तेजी से आती जाती है ।
और रोते हुऐ दुनिया में आने की वजह हस्ते हुए दुनिया में आना बच्चे के लिए बेबारिक नही होता । ऐसा क्यूं यो भी समझ लेते है जो बच्चे जब अपनी मां के गर्भ में होते हैं तब वे सांस नहीं लेते। दरअसल यो अमनियातिक साइट नाम के एक थैली में होते है जिसमे येमनिवेतिक फ्लूड भरा होता है। उस समय शिशु के फेफड़ों में हवा नहीं होते उनके फेफड़ों में भी इनबुटीक फ्लूड भरा होता है
दोस्तो बच्चे जब अपनी मां की कोख में होता है तब उसे अपना सारा गर्भनाल ही ज़रिए मिलता है खाना-वाना ऑक्सीजन बेगरा सब कुछ?
तो जन्म से पहले ही मां के गर्भनाल से ही जुड़ा रहता है उसे सांस भी गर्भनाल के जरिए मिलता है मां के शरीर से बाहर आते गर्भनाल काट दी जाती है और सब बच्चे को खुद से सांसे भी लेना पड़ती है। इसलिए जब बच्चा सांस लेता है
तो अपने मुंह और नाक में जमे फ्लूड तरल पदार्थ को पार करता है जन्म लेती ही शिशु को उल्टा लटकाकर उसके फेफड़ों से एनिमेटेड फ्लूट को बाहर निकाला जाता है। ऐसा करना बेहद जरूरी होता है ताकि फेफड़े सांस लेने के लिए तैयार हो सके इसके लिए जरूरी है की बच्चा लंबी सांसे ले ताकी फेफड़े के कोने-कोने से अमनिवेतिक फ्लूड निकल जाए। और फेफड़ों का इंर्पोटेंट हिस्सा जिसे एलवाई कहते हैं वहां तक हवा आने जाने के लिए रास्ता खुल जाए
दर्सल पदार्थों के निकल जाने पर सांस लेने का रास्ता खुल जाता है।और हवा का संचार आसानी से होने लगता है अपको बता दे की रोते समय बच्चा गहरी सांसे लेता है अहि वजह है जन्म के बाद बच्चा खुद नहीं रोता तो उसे हल्की सी चपत लगकर रुलाया जाता है
कभी कभी नवजात अपने आप नही कर पाता तो मेडीकल स्टाफ किसी संत लुडी पंप का इस्तमाल करके उसके फेफड़ों से फ्लूड खीच लेते है क्योंकी अगर क्यूं अगर बच्चा जन्म लेने के बाद ना रोए । तो इस फ्लूड को फेफड़ों में होने की वजह से बच्चे को ऑक्सीजन नहीं मिल पाएगी और तब मौत की वजह भी बन सकता है ।
दोस्तों यह जानना बहुत जरूरी है जन्म के समय बच्चे रोने से उसके दिमाग ऑक्सीजन की सप्लाई अच्छी तरह से हो पाती है। जिसको अल्टीमेटली ब्रेन का प्रॉपर विकास होता है
जब की इसकी उलट कोई बच्चा जन्म के बाद थोड देरी से रोता है p उन तक ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती और फिर ऐसे बच्चे में मेंटल डिसिविंग की आशंका बढ़ जाती है
इसके अलावा डिलीवरी यानी प्रसव का प्रोसेस मां और बच्चे दोनों के लिए बहुत दर्द भरा होता। बच्चा बहुत साकरे रास्ते से निकलकर दुनिया में आता है।
उसकी मां के शरीर में भीतर के सेव वातावरण से पूरी तरह अलग होता है। यानी वातावरण से निकलकर मुश्किलों भरी दुनिया में आना वैसे भी किसके लिए खुशी की बात होगी।
दोस्तों भारत का। प्रसंग तो आप सभी लोगों ने सुना होगा कैसे अभिमन्यु ने अपनी मां सुभद्रा की कोख में चक्रव्यू को भेजने की कला सीख ली थी माना की यो चक्रव्यू को भेजकर उसे बाहर कैसे आते यो सुन पाते। उससे पहले ही मां सुभद्रा को नींद आ गई और उनके गर्व में पल रहे अभिमन्यु चक्रव्यूह से बाहर निकलने की कला नहीं सीख पाए। ।
दोस्तो इस यदुवेद किस्से को लेकर महाभारत में वर्णन मिलता है। उसके मुताबीत अभिमन्यु सिर्फ 16 साल ही जीवित रह पाए थे और जन्म से पहले ही उनकी यायू तय कर दी गई। थी महाभारत के इस प्रसंग के अनुसर इस पृथ्वी पर धर्म की स्थापना करने के लिए भगवान श्री कृष्ण अवतार लेने वाले थे तब सभी देवी देवताओं से इसे में योगदान करने के लिए कहा। गया सभी देवी देवता इसके लिए तैयार भी हो गए। कुछ देवता सोयम मनुष्य बन कर धरती पर अवतरित हुए तो कुछ ने अपने पुत्रों को भेजा।
उसवक्त चंद्रदेव से भी कहा गया कि वह अपने पुत्र वर्षा को पृथ्वी पर अवतरित होने की आज्ञा दें। इसपर चंद्रदेव ने कहा कि वह अपने पुत्र का वियोग नहीं सह सकते। फिर देवताओं के अनुरोध पर उन्होंने कहा, वह अपने पुत्र को मात्र 16 साल के लिए इस धरती पर भेज सकते हैं। इसके बाद वह मेरे पास लौट आएगा। चंद्रदेव का यही पुत्र अभिमन्यु। हुआ पिता चंद्रदेव ने अपने पुत्र की आयु महज 16 साल निर्धारित करती थी। इसी कारण सुभद्रा के गर्भ में अभिमन्यु चक्रव्यूह में प्रवेश करना तो सीख गया, लेकिन जब चक्रव्यूह से निकलने का रास्ता अर्जुन बता रहे थे, उस समय सुभद्रा को नींद आ गई। फिर से अभिमन्यु चक्रव्यूह से निकलना नहीं सीख पाए और महाभारत युद्ध के दौरान इसी व्यू में फसकर वीरगति को प्राप्त हुए ।
तो दोस्तो आशा करते हैं नवजात बच्चे को रोने को लेकर इस पोस्ट में दी गई जानकारी आपको काम की लगी होगी तो आप अपने दोस्तो के साथ शेयर करे धन्यवाद।।
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