इंसान की मृत्यु क्यों होती हैं? मृत्यु कैसे होती है जानें! - Mrityu kaisi or kyo hoti hai ।हम क्यों मरते हैं? मृत्यु क्यों होती है?हम मरते क्यों है

नमस्कार दोस्तों, मैं gyani thakur  एक बार फिर से आप सभी को स्वागत है आज की इस पोस्ट में   और आप सब देख रहे है loveislifes.com  आज की इस पोस्ट में हम बात करने वाले है की ।इंसान की मृत्यु क्यों होती हैं? मृत्यु कैसे होती है जानें! - Mrityu kaisi or kyo hoti hai । मृत्यु से सबंधित कुछ जानकारी। ।जो आप सब को मिलने वाला है । तो आप भी मृत्यु की सच्चाई जानना चाहते है तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़े ।



इंसान की मृत्यु क्यों होती हैं? मृत्यु कैसे होती है जानें! - Mrityu kaisi or kyo hoti hai ।हम क्यों मरते हैं? मृत्यु क्यों होती है?हम मरते क्यों है


चाहे आप भगवान पर विश्वास रखते हो या ना रखते हो  साइंस में   यकीन करते हो या ना करते हो। लेकिन एक बात तो सबके लिए सच है मृत्यु जो पैदा हुआ है वह। एक दिन मरेगा भी यह  हम सब जानते हैं



, लेकिन आखिर हम मरते क्यों हैं। हम यहां रोड एक्सीडेंट सुसाइड या मर्डर की बात नहीं कर रहे हैं। हम बात कर रहे हैं बूढ़े  होकर मरने की। 


मरना कौन चाहता है लेकिन एक दिन हम मरते ही हैं। 


प्रकृति का यह नियम है। अगर हम नहीं मरेंगे तो सोचे क्या होगा अगर प्राकृतिक रूप से इंसान ना मरे तो कुछ दशकों में आबादी का ऐसा विस्फोट होगा जो किसी ने नहीं देखा होगा। 


हर तरफ इंसान  ही इंसान नजर आएंगे लेकिन जोकि धरती का आकार भी सीमित है और प्राकृतिक संसाधनों का भी तो धीरे-धीरे कंपीटिसन भी बढ़ता जाए गा और 1 दिन ऐसा भी आएगा। जब खाने के लिए इंसान एक दूसरे को मारना शुरू कर देगा है। प्राकृतिक रूप से ना सही, लेकिन फिर भी मौतें होंगी ही,



दोस्तो आप एक बात हमेशा याद रखिएगा पूरा ब्रह्मांड एक संतुलन से चलता है और इसी संतुलन की वजह से जीवन चलता है। दिन रात गर्मी सर्दी जीना मरना सब इसी संतुलन का हिस्सा है। प्रकृति में हर चीज एक दूसरे पर निर्भर है और अगर हमें संतुलन। 


छेड़छाड़ करते हैं तो अपने लिए समस्याएं खड़ी करते हैं। जंगल के नियम अलग है और इंसानों के अलग फूड चेन में जो जानवर सबसे ऊपर है, उन्हें छोड़कर कम ही जानवर बूढ़े  होकर मरते हैं। पर जो कि इंसान अपनी बुद्धि के विकास की वजह से उस खतरे से दूर है तो इंसान के मरने के रास्ते भी अलग है। हम अगर किसी भी हादसे का शिकार होने से बचे रहे तो भी 1 दिन समय का पहिया हमें उस पड़ाव पर ला खड़ा करता है जब हमारे। शारीर सेल्स का नवीनीकरण नहीं हो पाता वह दिल जो जमाने में अपने प्रेमी या प्रेमका को धड़कता था आब लड़खड़ाने लगता है ।


दीवारों से छलांग लगाने वाले  

और मैदानों में चीते जेसी टांगे वाले  जवाब देने लगती है। दिमाग भूल नहीं लगता है। आंखें तो लेपन का शिकार होती है। वह कान जो एक आहट पर चौंकाने हो जाते थे। अब कोई प्रतिक्रिया नहीं करते। उसे भी धीरे-धीरे बीमारियों का घर इसलिए भी बनता जाता है क्योंकि उससे लड़ने की क्षमता खत्म होते जाते है और 




हां यही शुरुआत होते है। इंसान के फना होने की हमारे शरीर में तकरीबन 37 ट्रिलियन सेल्स होते हैं। यही सब दिमाग चमड़ी मसल्स लीवर सब कुछ बनाते हैं। यहीं सेल्स जीवन का आधार भी है। यह सेल्स भोजन से न्यू ट्रेंस लेने में क्यूट यानर्जी में बदलने में मदद भी करते हैं। 


सेल्स वंशानुगत चीजें भी होती है और वह अपनी कॉपी भी बना सकते हैं। हमारे शरीर के करोड़ों सेल्स  अपना काम करने के बाद मरते हैं। और न्यू  सेल्स के लिए रास्ता बनाते हैं हमारे सेल्स अपनी कॉपी बनाना जीवन भर चलता रहता है।



 एक सेल के कॉपी होने पर टेलीमोर  नामक डीएनए का कैप भी छोटा होता जाता है। अहि टेलीकॉर  हमारे डीएनए में इंफॉर्मेशन को बचाने में सहायक होता है। हर बार सेल की कॉपी होने से पहले टेलीमॉर  एक समय में अपना काम करने के लिए काफी छोटा रह जाता है जिसके परिणाम स्वरुप सेल्स बूढ़े होने लगते हैं और ठीक से काम नहीं कर पाते हैं। सेल्स का बूढ़ा होना ही हमारे बूढ़े होने की भी निशानी है और एक समय जब यह बिल्कुल काम करना बंद कर देते हैं तो हमारी मृत्यु हो जाती है। 


मेथी अमर तो नहीं हो सकता, लेकिन प्रकृति इतनी बेरहमी नहीं होती। वह हमारे बच्चों में हमारे डीएनए ट्रांसफर करती है और बच्चों के बच्चों में उनके ऐसा करके हम एक तरह इनडायरेक्ट रूप से अमर भी हो जाते हैं और प्रकृति में संतुलन भी बना रहता है ।।।





इंसान की मृत्यु क्यों होती हैं?  मृत्यु कैसे होती है जानें! -Why do humans die? Learn how death happens! । मृत्यु से सबंधित कुछ प्रसं है।



अक्सर आप लोगों ने देखा होगा, किसी का एक्सीडेंट हो जाता है और उसकी मृत्यु हो जाती है। फिर  घर वाले कहते हैं कि बाहर ना  गए होते तो ऐसा ना होता। 


कोई व्यक्ति पानी में डूब कर मर जाता है तो लोग कहते हैं कि स्नान करने नदी तालाब में ना गए होते तो ऐसा ना होता । हो सकता था उसको मृत्यु  टल जाती ।



नहीं मेरे भाई  देखिए चाहे किसी का एक्सीडेंट हो जाए, या चाहे किसी की पानी मृत्यु हो जाए जहर से मृत्यु हो जाए या फिर किसी फसी लगाने से उसकी मृत्यु हो जाए । या फिर किसी एक व्यक्ति था एक व्यक्ति थाऔर भी दुर्घटना के कारण उसकी मृत्यु हो जाती है तो  ऐसे आप लोग कई लोगों को कहते हुए सुना होगा । वहा ना  गए होते तो शायद ऐसा ना होता। यह बुरी घड़ी उसके ऊपर से टल जाती लेकिन दोस्तो जो  निश्चित है, वह हमारे साथ होकर रहता है। 




हम आपको बता दें कि रामचरितमानस के बालकांड में साफ साफ यह प्रसंड  लिखा हुआ है। एक उदहारण दे  । हम आपको कि एक प्रताप भानु नाम के राजा हुआ करते थे और एक बार उनके घर पर बहुत से संस्थाएं ब्राह्मणों  आएं और सभी को भोजन करा रहा था। 




लेकिन मेरे दोस्तो जो उनका रसोईया  था यानी भोजन बनाने वाले यो रोसाई एक मायावीर  राक्षस था उस मायावी राक्षस ने सभी संतो को और ब्राह्मणों को उनकी थालियों  मांस परोस दिया और संतों ने तथा ब्रावाणो  ने देखा कि हमारे थाली में मांस  तो उन्होंने राजा प्रताप भानु को श्राप दे दिया  की  तू सदा के लिए राक्षस बन जा ।।


अब राजा प्रताप भानु अपने मन में विचार करते है कि मैंने भंडारा ना कर आया होता संतो को और ब्राह्मणों को भोजन कराया होता तो आज मेरी यह दुर्गति ना होती। शायद  मेरे ऊपर से यह बुरी घड़ी टल जाती।।

वहीं राजा प्रताप भानु बाद में जाकर रावण बने। 



दोस्तो जो रामचरितमानस में लिखा है कि जो होना यो हमरे साथ या आपके साथ होकर रहता है। वह किसी भी प्रकार से टलता नहीं है। और जो नहीं होना था , वह हमारे साथ कदापि नहीं होगा। 



जिसकी मृत्यु जहा लिखी है जेसे लिखी है और जब लिखी है ।वैसे ही होकर रहती है चाहे अपने घर में बिस्तर पर या फिर किसी सड़क द्रुघटना के कारण या फिर किसी नदी तालाब के कारण ।



महाभारत में भीसम पितामा के जेसे मृत्यु लिखी थी बनो की शैय्या पर ठीक वैसे ही हुई । इसी तरह जिसकी मृत्यु जेसी भी लिखी हुई है वैसे ही निश्चित होकर ही रहता है।


इंसान की मृत्यु क्यों होती हैं? मृत्यु कैसे होती है जानें! - Mrityu kaisi or kyo hoti hai । मृत्यु से सबंधित कुछ जानकारी।


अकाल मृत्यु क्यों होती है


इस लिए हमे इस  पर शोक नहीं करना चाहिए, इसपर हमें परेशान नहीं होना चाहिए। लेकिन फिर लोग कहते हैं कि अकाल मृत्यु क्यों होती है? 


दरासल यह अकाल मृत्यु नही होते है यह निश्चित मन लीजिए की एसे हमारे साथ होना ही है 


लेकिन दोस्तों शास्त्र कहते हैं। जो सुबह  शालिग्राम भगवान का या फिर लड्डू गोपाल जी का नहाने के बाद जो पानी बचता है ना उसे चरण मृत कहते है जो  भगवान की पूजा करके उने प्रणाम करके चरना मृत पान करके अपने घर से बाहर निकलता है । उसकी कभी भी अकाल मृत्यु  नही होती है। 



अपको बता दे की अकाल मृत्यु का अर्थ ए है 

की मार गया कोई सड़क द्रुघट्ना में या पानी में डूब कर मर गया ।इसे कुछ लोग अकाल मृत्यु कहते है 



परंतु शास्त्र कहते है की यह निश्चित है आदि अकाल मृत्यु होती है तो यह बात बिलकुल सच है की आदि समय के पहले यनायश इस प्रकार की मृत्यु हो जाए ।


दोस्तों  हम आपको बता दें कि हमारे गुरु जान कहते हैं।की 80 वर्ष के पहले आदि किसी वेक्ती की मृत्यु हो जाती है तो उसे अकाल मृत्यु ही कहा जाता है ।फिर क्या करें । किसी धुंधकारी की अकाल  मृत्यु हो गई। पत्नी में  गला दबाकर मार डाला फिर वह क्या बना प्रेत बना 



जो पुन्य आत्मा वेक्ति मरते है  आप लोग स्वामी विवेकानंद को तो जानते ही हैं। उनकी मृत्यु  40 वर्ष में हुई थी जो  व्यक्ति सच्चाई के मार्ग पर चलता रहा है। अपने जीवन में हमेशा पुण्य  करता है तो आदि 20 वर्ष की होकर वह मर जाता है।यो निश्चित ही  भगवान के धर्म को जाएगा।


 परंतु जो पापी  लोग हैं। जो हमेशा अपने ज़िंदगी में गलत काम करते हैं, भगवान को नहीं मानते हैं, दूसरों पर अत्याचार करते हैं तथा अपने माता-पिता का अपमान करते हैं और किसी कारण उस पापी मनुष्य की मृत्यु हो जाती है तो निश्चित मन लीजिए की वह अपनी बाकी की जिंदगी में भटके गै अभी उनका कार्य जब तक पूरा नहीं होगा वे भटकती रहेंगे ।इसलिए मेरे दोस्तो जो उनके नाम से जितना पुण्य बन सके । पिंड दान है अर्पण है गया जी है भगवत गीता का पाट है जो आप उनके लिए कर सकते है तो आप जरूर करिएगा । ऐसा करने से उनकी आत्मा को कभी हद तक संती मिल सकते है 


आदि दोस्तो इस पोस्ट में हम कुछ गलत कह दिया होगा तो आप हमे छोटा भाई समझ कर माफ कर दे ।



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