ध्यान की खोज केसे हुई ?ध्यान योग कैसे करे ? ध्यान योग क्या है

हेलो दोस्तो आप सब केसे हो। आज की इस पोस्ट हम बात करने वाले है कि ध्यान की खोज कैसे हुई । जी हा दोस्त आज की पोस्ट इसी के ऊपर आधारित है।तो आप इस पोस्ट के अंत तक बने । ताकि आपकी पूरी जानकारी मिल सके ।

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ध्यान की खोज केसे हुई ?ध्यान योग कैसे करे ? ध्यान योग क्या है



परंतु जो व्यक्ति योग निद्रा में निपुण हो जाता है या ध्यान रखता है अपने शरीर और मन को शांत कर लेता है विचारों को रोक लेता है। तो यो व्यक्ति धीरे धीरे अपने सुपर कॉन्स्ल में पहुंच जाता है। मैं आपको एक बात बता दूं  जो  हमारे सुपर माइंड  की शक्ति है। यो हमारे कॉन्सल माइंड से हजारों गुना ज्यादा है





ध्यान की खोज केसे हुई


ध्यान  की खोज कैसे हुई और कहां हुई ध्यान की खोज हुईं खालीबन से पृथ्वी पर मनुष्य का एक ऐसा  जीव है कभी भर  नहीं सकता कोई भी व्यक्ति सिकेनाद्र की  तरह पूरी दुनिया को ही क्यों न जीत ले लेकिन फिर भी वा अधूरा रहता है मनुष्य एक ऐसा जीव है जो कभी पूर्ण हो ही नहीं सकता मनुष्य की जिज्ञासा उसकी प्यास वो जितनी मिटाता है यह उतनी ही बढ़ती जाती है आप जितना भी क्यों न जान ले आपको जानने के बाद पता लगेगा कि आप ने कुछ नहीं जाना ।




आप क्या सोचते हो अगार अप चांद या मंगल पर बस्ती बना भी लोगे तो क्या आप यहीं रुकने वाले हो । नहीं आप और भी बिगोराफी  की खोज करोगे तो इसी को समझते हुए भरत के अधायमिक विज्ञानिक नो ध्यान की ख़ोज की ।


जी हा  ध्यान की खोज भारत में ही हुई है और ध्यान की खोज वही यही देश कर सकता है  जो कभी संग्रस हो गया हो सर्मपुन हो गया हो  इस पूरी पृथ्वी पर अकेले भारत ने  मुक्ता की उस ऊंचाइयों को छू लिया था 


भारत बहुत बार भरा पूरा था संपूर्ण था आप इसका अंदाजा ऐसे लगा सकते हैं जो भारत को लूट कर कौन सा देश अमीर बन गया तो इसी प्रकार से भारतीय कृषि मुनियों के मन में एक खयाल आया ।।





कि जहां हम सो कर उठते हैं तो इतना तरोताजा महसूस क्यों करते हैं  हमारा शरीर अलर्ट अचूक होता है मूर्ति वाल होता है मन शांत होता है और  भीतर एक सका रत्मा फैल जाते है । लेकिन  जब हम दिन भर काम करते हैं तो शाम होते होते हैं हम थक जाते हैं और साथ ही हमारे मन में बेचैनी भर जाती है मन की शांति कहीं गायब हो जाती है।।





तब हम रात में सो जाते हैं अगले दिन फिर से वही तरोताजा महसूस होते हैं  तब भारत के आद्रतियोन  क्रो ने यह जानने की कोशिश की आखिर नींद में ऐसा क्या है जो हमारे शरीर को तरोताजगी से भार देता है उस बात का पता लगाने के लिए  आध्यात्मिक गुरु ने मनुष्य को सोते हुए अबजॉप करने की शुरू किया उन पर स्रोत किया  जब उन्हें सोते हुए व्यक्ति को देखने शुरू किया तो उन्हें यह पता लगा कि व्यक्ति जब सो रहा होता है तब उसका शरीर शीतेल होता है 


रिलैक्स होता है उसकी सांसों की गति भी कम हो जाती है क्योंकि शरीर को इतनी ऊर्जा की आवश्यकता नहीं पड़ती क्योंकि शरीर तो शांत रेहता है क्यो है ना। तो वह व्यक्ति को सोते हुए शरीर पर  सोर्ध करने के बाद । वे भारी रूप से केवल इतना ही जान पाए  लेकिन अभी भी उन्हें यह पता नहीं लग पाया एक सोते हुए व्यक्ति में आंतरिक रूप से ऐसा क्या घड़ता  है तो उसकी शरीर को टूटी फूटी  सीकई  रिपेयर हो जाती है ।



और बहुत सी छोटी-मोटी बीमारियों का इलाज यह शरीर सोते सोते वक्त खुद का कर लेता है तब उन भारतीय खोजी ने अपने ही ऊपर जागते हुए नींद का प्रयोग किया  क्योंकि नींद में व्यक्ति तो सोया हुआ होता है अब सोते हुए इसके भीतर क्या घट रहा है यह वह जान  नहीं पा रहे थे  तो इसका प्रयोग तो स्वयं किया जा सकता है तभी आप जान पाओग तो उन्होंने गुरु ने सोचा कि जब हम सोते हैं तब हमारा शरीर और मन शांत हो जाता है  तो क्यों ना हम जागते हुए एक बार सो  के देखें तो 


इसके लिए भारतीयों के ऋषि-मुनियों ने क्वेश्चन शिव  का प्रयोग किया चुपचाप शांत बैठ गए शरीर को बिल्कुल शीतल कर दिया अपने मन को भी धीरे-धीरे शांत कर लिया तो उन्होंने देखा जैसे ही उसका शरीर और मन शांत हुआ तब उनके भीतर ग्रैं शांति का जन्म होने लगा 



इतना ही नहीं उसके भीतर एक अजीब सा ढंग का आनंद हुआ एक नए प्रकार की ऊर्जा शरीर जन्म लेने लगी और वह सब कुछ घटने लगा जो सोते समय एक व्यक्ति का शरीर में घटता है लेकिन सोते समय कोई भी व्यक्ति अपने शरीर के भीतर जान  नहीं सकता कि क्या घट रहा है लेकिन काउंसिल स्लिप ने यो ऋषि मुनि जान पा रहे थे आखिर  भीतर की घटना किस प्रकार घट रही है अब इतना सब कुछ होने के बाद  यो ऋषि मुनि उनके भीतर की जिज्ञासा प्यास और भी बढ़ गई तो इसके आगे चलकर देखा जाए क्या होता है ।


वह और इसी प्रकार जागते हुए सोने की विधि कंटिन्यू करते रहें और धीरे-धीरे वे चेतना की उस यायाम में पहुंच गई और जब वहां पहुंचे असीमा अनंद असीम ज्ञान  शक्तियों का जन्म उनके भीतर होने लगा इस प्रकार के बाद भारतीय के ऋषि मुनि अपने आत्मा के उस चेतार  में पहुंचने के बाद इतने ज्यादा प्रभावित हुए  तब उन्होंने अपने विधि को काउंसिल स्लिप को ध्यान का नाम दे दिया


 इसीलिए भारतीयों के ध्यान ग्रंथों में योग  नेत्र अभी कहते हैं । और योग नीत्र का मतलब होता काउंसिल स्लिप । मतलब जागते हुए सोना । यानि  शरीर सोया हुआ हो लेकिन आपके भीतर का होस  जागा हो  देखिए योग नित्रा  और सम्मानित नींद में फर्क होता है  


सामान्य नींद में जब व्यक्ति होता है तो उनके सोते समय उसके चेतना उसका होस वह डीजोल  हो जाती है या कहीं गायब हो जाता है । इसीलिए सोते समय व्यक्ति को होश नहीं होता।  वह लगभग बेहोश होता है और वह व्यक्ति चेतन मन की गहराइयों में चला जाता है 


परंतु जो व्यक्ति योग नित्रा  में निपुण हो जाता है याह ध्यान करता है अपने शरीर और मन को शांत कर लेता है विचारों को रोक लेता है तो वह व्यक्ति धीरे-धीरे अपने सुपर काउंसिल में पहुंच जाता है ।।


मैं आपको एक बात बता दूं ।। जो हमारे सुपर माइंड  काउंसिल की जो सकती है । वह हमारे mesal माइंड की शक्ति से हजारों गुना ज्यादा है  । मतलब जो हमारा सुपर कॉन्सल माइंड है वे अति गुणों का भंडार है ।


जबकि हमारे काउंसल माइंड में साधारण शक्तियां है लेकिन उन साधारण शक्तियों को हम चमत्कारी शक्तियों कह सकते हैं हमारे संस्कार आने के हमारी पिछले जन्म की शक्तियां वह हमारे सब  काऊसल माइंड में होते हैं ।।

वहां आपके जन्मों-जन्मों का डाटा स्टोर है अगर एक व्यक्ति चाहे सब अपने काउंसल माइंड की शक्ति इस्तेमाल करके जो हासिल करना चाहे कर सकता है जो पाना चाहे पा सकता है ।


लेकिन सुपर काउंसल माइंड वे इन सब के परे है और हमारा सुपर काउंसल माइंड वह परमात्मा का राज है वहां केवल दिव्यता रहता है वह आनंद ही आनंद है जो लोग सम्मानीय नींद सोते हैं वह अपनी चेतना को खो देते हैं । और वह सब अपने कंसल्ट माइंड मैं  चले जाते हैं। 


लेकिन जो सोते समय अपनी चेतना को बनाए रखते हैं उनके परमात्मा का ज्ञान आनंद के शक्तियां सब प्राप्त हो जाते हैं ।।


इसी प्रकार से भारतीयों के ऋषि-मुनियों ने योग नेत्र की  माध्यम से काउंसल स्लिप के माध्यम से । ध्यान की विज्ञान को जन्म दिया ।।


आपको पता होना चाहिए ध्यान एक अंधविश्वास के ऊपर आधारित किया नहीं है ध्यान कोई रिचुअल नहीं है कोई कर्मकांड नहीं है किसी एक धर्म का नहीं है ध्यान तो स्वयं खोज की विज्ञान है जो लोग ध्यान को अपने जीवन में अपनाते हैं जो उनको ध्यान से लाभ होते हैं उनसे उसका जीवन  धन हो जाता है और आसान भी 


दोस्तों अगर इस पोस्ट में दिए हुए जानकारी आप लोग को अच्छा लगा तो अपने दोस्तों के पास जरूर शेयर करें धन्यवाद ।






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